जांच रिपोर्ट से पहले निर्माण पर ‘मरम्मत’ का खेल? धनोद से बुलाया गया पेंटर, काम शुरू होने से पहले खुला राज; कटघोरा CMO की चुप्पी पर भी सवाल
अटल परिसर निर्माण में अनियमितता के आरोपों के बीच नया विवाद, जांच पूरी होने से पहले ही क्षतिग्रस्त हिस्सों को सुधारने की तैयारी का दावा

कटघोरा। नगर पालिका कटघोरा के बहुचर्चित अटल परिसर निर्माण को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। निर्माण की गुणवत्ता और कथित अनियमितताओं को लेकर जांच चल रही है, लेकिन इसी बीच सामने आई एक नई जानकारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही निर्माण स्थल के उन हिस्सों पर पेंट-पुट्टी कराने की तैयारी की जा रही थी, जिनकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ चुके हैं।
बताया जा रहा है कि इसके लिए धनोद से एक पेंटर को बुलाया गया था। हालांकि, काम शुरू होने से पहले ही मामला सामने आ गया और कथित तौर पर पेंटिंग का काम नहीं हो सका। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब निर्माण कार्य की जांच चल रही थी, तब संबंधित हिस्सों में किसी तरह का सुधार या रंग-रोगन कराने की जरूरत क्यों पड़ी?

जांच के बीच निर्माण स्थल में बदलाव की तैयारी क्यों?
अटल परिसर निर्माण को लेकर पहले से ही निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। दीवारों में दरार, प्लास्टर की स्थिति और निर्माण कार्य में कथित तकनीकी खामियों को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं शिकायतों के बाद अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण और जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।

ऐसे में जांच पूरी होने से पहले यदि निर्माण के विवादित हिस्सों पर पुट्टी, पेंट या मरम्मत का काम कराया जाता, तो इससे मौके की वास्तविक स्थिति बदल सकती थी। यही वजह है कि धनोद से पेंटर बुलाए जाने की जानकारी ने पूरे मामले में नया सवाल खड़ा कर दिया है।
पेंटर आया, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका

सूत्रों के अनुसार, पेंटर को निर्माण स्थल पर काम के लिए बुलाया गया था। उद्देश्य क्या था और किसके निर्देश पर उसे बुलाया गया, यह अभी जांच का विषय है। हालांकि, पेंटर द्वारा काम शुरू किए जाने से पहले ही इसकी जानकारी सामने आ गई और कथित तौर पर काम रुक गया।
यदि यह जानकारी सही है तो यह जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्योंकि किसी भी तकनीकी जांच में मौके की वास्तविक स्थिति महत्वपूर्ण साक्ष्य होती है। जांच से पहले दरारों, प्लास्टर या अन्य खामियों को ढंकने की कोशिश होती, तो बाद में वास्तविक स्थिति का आकलन प्रभावित हो सकता था।
CMO से सवाल, लेकिन नहीं मिला जवाब
मामले में मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। फोन पर उनका पक्ष नहीं मिल पाने के कारण पेंटर को बुलाने के पीछे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि बिना संबंधित अधिकारी का पक्ष लिए किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। इसलिए पूरे मामले में CMO या नगर पालिका प्रशासन का आधिकारिक स्पष्टीकरण बेहद जरूरी है।
जांच से पहले ‘लीपापोती’ हुई तो जिम्मेदार कौन?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि निर्माण स्थल की खामियां जांच का हिस्सा हैं, तो जांच पूरी होने से पहले वहां पेंट-पुट्टी या मरम्मत कराने की अनुमति किसने दी?
क्या पेंटर को किसी अधिकारी के निर्देश पर बुलाया गया था?
क्या नगर पालिका ने उसे काम के लिए अधिकृत किया था?
यदि नहीं, तो पेंटर को बुलाने वाला कौन था?
और सबसे अहम—क्या इस संबंध में कोई लिखित आदेश या कार्यादेश जारी हुआ था?
इन सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आना जरूरी है।
अब निगाह जांच रिपोर्ट पर
अटल परिसर निर्माण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है। यदि जांच में निर्माण संबंधी गंभीर खामियां सामने आती हैं तो जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि जांच के दौरान निर्माण स्थल की स्थिति बदलने की कोशिश तो नहीं की गई।
फिलहाल पेंटर को बुलाए जाने और काम शुरू होने से पहले ही मामला सामने आने की जानकारी ने विवाद को और हवा दे दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम को महज एक सामान्य पेंटिंग का काम मानता है या इसे जांच प्रक्रिया की दृष्टि से गंभीरता से लेते हुए अलग से जांच कराता है।
अटल परिसर की दीवारों पर पड़ी दरारें सिर्फ निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल नहीं उठा रहीं, बल्कि अब यह भी पूछ रही हैं—जांच से पहले आखिर किसे क्या छिपाने की जल्दी थी?









